वाराणसी, मार्च 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी की सांस्कृतिक संस्था गोकुल आर्ट्स से जुड़े अत्यंत सक्रिय, समर्पित और कर्मशील रंगकर्मी मोतीलाल गुप्त अब इस दुनिया में नहीं हैं। शुक्रवार रात उनके दिवंगत होने के बाद संस्था से जुड़ी उनकी स्मृतियां आंखों के सामने आ गईं। इसके जरिए रंगमंच के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनके समर्पण ने लोगों को कहने के लिए मजबूर कर दिया कि मोतीलाल व्यक्ति नहीं, बल्कि नाट्य संस्था थे। अस्सी स्थित रंगशाला में शनिवार को संस्था की ओर से शोकसभा में दिवंगत रंगकर्मी मोतीलाल गुप्त को श्रद्धांजलि दी गई। रंगकर्मियों ने रंगमंच के लिए उनके जुनून को अद्भुत बताया। कहा कि वह 'गोकुल चंद्र गांगुली स्मृति अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता' की तैयारी मनोयोग से करते थे। वह मानते थे कि यह कार्यक्रम सिर्फ आयोजन नहीं, रंगमंच के प्रति उ...