नई दिल्ली, अप्रैल 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार हैं। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि ये अधिकार केवल उसी हद तक मौजूद हैं, जिस हद तक कानून में इनका प्रावधान है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार एक अलग और अतिरिक्त अधिकार है। 'लाइव लॉ' के अनुसार, कोर्ट ने कहा, "यह बात पूरी तरह से तय है कि न तो वोट देने का अधिकार और न ही चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार है।" पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जहां वोट देने से चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी संभव होती है, वहीं चुनाव लड़ने का अधिकार एक अलग और अतिरिक्त अधिकार है, जो योग्यता, पात्रता की शर्तों और अयोग्यता के अधीन हो सकता है। यह मामला राजस्थान में 'जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी सं...