नई दिल्ली, मार्च 24 -- शेखर चंद्र जोशी, प्रोफेसर एवं कला विशेषज्ञ मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में संस्कृति, रचनात्मकता और कलात्मक अभिव्यक्ति केवल सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, पहचान, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के बीच हुए सांस्कृतिक समझौते यही संकेत देते हैं कि संस्कृति अब कूटनीति, सहयोग और सतत विकास का एक सशक्त माध्यम बन रही है। सांस्कृतिक सहयोग और नीतिगत साझेदारियों में दुनिया भर में उल्लेखनीय वृद्धि दिख रही है। पेरू और यूरोपीय देशों के बीच स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा हेतु सहयोग को सुदृढ़ किया गया है। इसी प्रकार, क्रिएटिव न्यूजीलैंड और नियू सरकार के बीच प्रशांत क्षेत्र में सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए समझौता हुआ...