नई दिल्ली, अक्टूबर 25 -- आलोक जोशी, वरिष्ठ पत्रकार दुनिया की अर्थव्यवस्था इस वक्त एक अजीब दुविधा में फंसी हुई दिखती है। शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव है। ईरान, अमेरिका इजरायल युद्ध ने तेल और ऊर्जा की कीमतों पर अनिश्चितता बढ़ा दी है। दुनिया भर की सरकारें कर्ज के बोझ से दबी हैं और अमेरिका से लेकर यूरोप तथा चीन तक के आर्थिक विकास पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी तरफ, विकराल आकार की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी एआई में अरबों डॉलर झोंकती चली जा रही हैं और यह भी लग रहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार उम्मीद से बेहतर रफ्तार दिखा रहा है। ऐसे में, यह सवाल क्यों उठता है कि क्या दुनिया एक और मंदी की तरफ बढ़ रही है? अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अक्तूबर 2026 की अपनी ताजा रिपोर्ट में आशंका जताई है कि विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2025 ...