नई दिल्ली, नवम्बर 5 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक कलह और खराब शादी से उपजी पीड़ा के आधार पर पूरे परिवार को आपराधिक कार्यवाही में नहीं फंसाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब तक कि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कोई ठोस आरोप न हों और उनकी अलग-अलग भूमिकाएं स्पष्ट न की गई हों। जस्टिस मधु जैन की पीठ ने बुधवार को सुनाए गए अपने फैसले में वैवाहिक विवादों के दौरान पति के रिश्तेदारों पर क्रूरता के आरोप लगाकर उन्हें फंसाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। जस्टिस जैन ने कहा कि आपराधिक मुकदमों के परिणाम अदालत के बाहर तक जाते हैं जो किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, आजीविका और पारिवारिक जीवन पर असर डालते हैं। उन्होंने कहा कि कानून को क्रूरता का सामना करने वाली महिलाओं को प्रभावी सुरक्षा देनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि रिश्तेदारों पर केवल पति से...