वैदिक विचारों से सशक्त होगी नारी, सुरक्षित होगा पर्यावरण
दरभंगा, मई 15 -- राजीव रंजन झा,दरभंगा। लनामिवि के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में वैदिक वाङ्मय में नारी-विमर्श विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, हरियाणा के पूर्व संस्कृत प्राध्यापक एवं प्रधानाचार्य डॉ. कामदेव झा ने कहा कि वेद कालीन नारी विद्या, धन, बल आदि से युक्त थीं जो अपने इच्छानुसार सुयोग्य वर का चयन भी करती थीं। उन्होंने कहा कि नारी पुरुष की शत्रु नहीं हो सकती, बल्कि दोनों प्रगति रूपी गाड़ी के दो पहिए के समान हैं, जिनमें संतुलन अनिवार्य है। भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीन, समृद्ध, उत्कृष्ट एवं गौरवशाली संस्कृति है, जिसमें नारी का सदा ही सम्मान रहा है। प्रो. जीवानन्द झा ने कहा कि वैदिक नारियां सार्वदेशिक एवं सर्वकालिक रूप से प्रासंगिक हैं। यह भी पढ़ें- अवैतनिक कार्यों की सामाजिक मान्यता जरूरी वैदिक ना...
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