चमोली, नवम्बर 25 -- चमोली जिले के काश्तकारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान मंडल में सीडीओ डा. अभिषेक त्रिपाठी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान के वैज्ञानिक डॉ. ओएम तिवारी एवं जड़ी बूटी संस्थान के वैज्ञानिक एके भंडारी ने नील-हरित शैवाल की कृषि के बारे में जानकारी दी। वैज्ञानिक ओएम तिवारी ने नील-हरित शैवाल की कृषि के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि नील हरित शैवाल स्पिरुलिना एक मात्र शैवाल है जिसको मानव आहार के रूप में प्रयोग कर सकता है। इसकी विश्व में कुल नौ प्रजातियां पाई जाती हैं। कहा कि पूर्व में यह अवधारणा थी कि स्पिरुलीना शैवाल केवल समुद्र में पाया जाता है लेकिन लोकटक झील मणिपुर का शोध करने पर पता चला कि यह शैवाल ताजे पानी में भी पायी जाती है जिस कारण इसकी खेती करने की संभा...
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