भदोही, अप्रैल 5 -- ज्ञानपुर, संवाददाता। मौसम में बदलाव आने से मछली में वैक्टेरिया फंगस का खतरा बढ़ गया है। बीमारी से बचाव का समय से प्रबंधन नहीं हुआ तो बड़ी मात्रा में मछलियां मर भी सकती हैं। चूना व पोटैशिमय का घोल बनाकर मत्स्य पालन तालाब में छिड़काव कर मछलियों को बीमारी से बचा सकते हैं। प्रभारी जिला मत्स्य अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि बदलते मौसम में मछली पालकों को सावधानी बरतना होगा। इन दिनों वैक्टेरिया फंगस का खतरा बढ़ गया है। रोग की चपेट में आते ही मछली के स्कीन पर लाल व सफेद का चकत्ता पड़ने लगता है। ऐसे में मत्स्य पालक दो कुंतल प्रति हेक्टेयर चूना का घोल व दो सौ ग्राम प्रति हेक्टेयर पोटैशिमय का घोल तैयार कर तालाब में छिड़ाव करें। ऐसे प्रबंधन से मछली बीमारी की चपेट में आने से बच कसती हैं।
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