गोड्डा, अगस्त 18 -- मनुष्य योनी सबसे श्रेष्ठ योनी है।अच्छे कर्म और पूर्व जन्म के संस्कार के कारण मनुष्य योनी मिलती है। मनुष्य जीवन सिर्फ भोग के लिए नहीं,भोग और कर्म दोनों के लिए मिला है। उक्त बातें आर्य समाज के वैदिक पुरोहित विद्यानिधि आर्य ने रविवार को आर्य समाज मंदिर पचरी में सार्वजनिक रूप से आयोजित साप्ताहिक हवन यज्ञ के पश्चात प्रवचन के दौरान कही।

वेद का महत्व कहा कि ईश्वर ने जब सृष्टि का निर्माण किया तो मनुष्य के कल्याण के लिए ऋषि के माध्यम से चार वेद का ज्ञान दिया। तत्पश्चात गुरु शिष्य परंपरा के तहत ऋषियों ने इसका ज्ञान अपने शिष्यों को दिया। वेद से ही चार ब्राह्मण ग्रंथ,11 उपनिषद व अन्य ग्रंथ की रचना की गई। वेद का ज्ञान सार्वभौमिक है।यह सभी पर लागु होता है।जितने भी विद्या और ग्रंथ हैं, सभी वेद से हीं लिए गए हैं।

जीवात्मा और शरीर कह...