वाराणसी, अगस्त 28 -- वाराणसी। महाभारत और स्कंद समेत 18 पुराणों के रचनाकार वेद व्यास मुनि ने भी काशी में शिवलिंग की स्थापना की है। परमपिता परमेश्वर के संबंध में अन्य ऋषियों से वाद-विवाद के बाद वह अपने 10 हजार शिष्यों के यहां पहुंचे थे। वह भगवान विष्णु के परम भक्त थे। काशी में शिव की महिमा के अनुभव के बाद उन्होंने कर्णघंटा पुष्करिणी के पास शिवलिंग की स्थापना की। कालांतर में इनका नाम व्यासेश्वर पड़ा। गुरु पूर्णिमा के दिन इनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इनके पूजन-अर्चन से श्रद्धालुओं को दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है। वे स्वर्गलोक प्राप्त करते हैं। यह भी पढ़ें- मां दुर्गा का जन्मोत्सव पर कल विविध कार्यक्रम

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