वीरों का आभूषण है क्षमा : मुनि भावसागर महाराज
वाराणसी, जुलाई 28 -- वाराणसी। भेलूपुर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 23वें चातुर्मास और अष्टाह्निका महापर्व के आठवें दिन मंगलवार को मुनि भावसागर महाराज ने कहा कि क्षमा साधारण शब्द नहीं है। यह वीरों का आभूषण है। क्रोध और अहंकार त्यागकर क्षमा मांगने और करने वाला सच्चा विजेता होता है। परिवार, समाज और रिश्ते में मनमुटाव होने पर क्षमा मांगने से मन हल्का होता है। संबंध मधुर होते हैं। उन्होंने प्रत्येक चतुर्दशी पर क्षमावाणी के पालन का आह्वान किया। धर्मसभा में मुनि भावसागर महाराज ने कहा कि प्रतिदिन 15 मिनट आत्मचिंतन और आत्मध्यान जरूर करना चाहिए। इससे आत्मा शुद्ध होती है। आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह भी पढ़ें- Lucknow News: सवा लाख मंत्रों की आहुति से साथ सम्पन्न हुआ सिद्धचक्र विधान कहा कि काशी की भूमि अत्यंत पवित्र और आध्यात्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.