लखनऊ, जनवरी 20 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता प्रख्यात आलोचक वीरेन्द्र यादव को शहर के लेखकों, संगठनों की ओर से मंगलवार को श्रद्धांजलि दी गई। लेखकों, सांस्कृतिक संगठनों की ओर से कैफी आजमी सभागार में हुई श्रद्धांजलि सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नलिन रंजन सिंह ने वीरेन्द्र यादव की पुस्तकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वीरेन्द्र यादव सिर्फ कथा आलोचक ही नहीं थी बल्कि एक जनबुद्धि जीवी थे, उनकी रचनाएं, वर्चस्व की सत्ता का प्रतिपक्ष रचती है। उनके उपन्यासों की सूची देखकर पता चलता है कि ये हाशिए के समाज के पक्षधर आलोचक थे। इप्टा के राकेश ने कहा कि वे भौतिक रूप से भले वीरेन्द्र यादव अब हमारे बीच में नहीं है लेकिन यादों में रहेंगे वैचारिक रूप से साथ रहेंगे। डा. नदीम हसनैन ने अपने सहपाठी के दौर को याद करते हुए कहा कि जीवन...
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