सहारनपुर, जुलाई 9 -- सहारनपुर जैनमुनि आचार्य श्री 108 विमर्श सागर महाराज ने वर्षायोग के विषय में कहा कि मनुष्य के जीवन में जब वैराग्य की भक्ति उत्पन्न होती है और वह साधु मार्ग पर चलना चाहता है तो उसे बाह्य त्याग तो हो जाते हैं, लेकिन इससे पूर्व अंतरंग परिग्रह का त्याग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दस जुलाई को विश्व शांति के लिए श्री दिगंबर जैन मंदिर में मंगलकलश की स्थापना होगी। उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि मन से राग द्वेष को दूर कर सभी को समान समझ कर आशीर्वाद देना चाहिए। यह नहीं सोचना कि यह मेरा प्रिय है अथवा अमित्र है। बाहर से त्याग कर दूसरों को दिखाना आसान है, लेकिन सबसे अधिक कठिन है अपने ह्रदय के राग द्वेष, छल, कपट, लोभ को समाप्त कर सभी पर प्रेम की समान रूप वर्षा कर समान भाव देखना। दिगंबर मुनि दीक्षा के बाद नंगे पैर पद विहार करते है...
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