रांची, फरवरी 3 -- रांची। झारखंड में हर साल 35 से 40 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में मरीज आज भी बीमारी की पहचान अंतिम चरण में होने के कारण समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं। रिम्स के आंकोलॉजी सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रोहित झा ने बताया कि झारखंड में कैंसर से होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह बीमारी नहीं, बल्कि देरी से जांच और जागरूकता की कमी है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते एक वर्ष में रिम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में 3,412 मरीजों ने परामर्श लिया। इनमें सबसे ज्यादा मामले सिर और गर्दन (हेड एंड नेक) कैंसर के रहे, जिनकी संख्या करीब 700 रही। इसके बाद स्तन कैंसर के 639, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के 509, पेट कैंसर के 363 और अंडाशय कैंसर के 33...
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