जमशेदपुर, अगस्त 10 -- आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लंबे समय से चली आ रही है। अब जब 9 अगस्त को एक बार फिर से विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है तो कोल्हान के आदिवासियों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद करने की ठानी है। अब हक-हुकूक की लड़ाई की मशाल आदिवासी युवाओं ने थाम ली है। जमशेदपुर के युवा आदिवासी आंदोलनकारियों ने अधिकारों की लड़ाई में मोर्चा संभाला है। ये आदिवासी युवा पूर्वजों की तरह जल, जंगल और जमीन के लिए संघर्षरत हैं। इन युवाओं ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का सख्ती से पालन पर जोर दिया है। आदिवासियों की दलील है कि अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया मुंडा, मानकी और मांझी बाबा की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही शुरू होनी चाहिए। यह मांग उनकी जल, जंगल और जमीन पर आधारित स्वायत्तता को सु...