बस्ती, मई 5 -- बस्ती, निज संवाददाता। विश्व अस्थमा दिवस पर जागरूकता गोष्ठी हुई। चेस्ट फिजीशियन डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि अस्थमा एक नियंत्रित होने वाली बीमारी है, लेकिन देर से बीमारी की पहचान व इलाज और बचाव में लापरवाही रोग को गंभीर बना देती है। यह छोटे, बड़े-बुजुर्ग को प्रभावित कर सकती है। बीमारी ज्यादा गंभीर होने पर जानलेवा तक हो सकती है। उन्होंने बताया कि रात के समय बार-बार खांसी आना, सांस में सीटी जैसी आवाज (विजिंग) और हल्की मेहनत में भी सांस फूलना, अस्थमा रोग होने के यह तीन प्रमुख संकेत हैं। यह भी पढ़ें- तापमान के उतार-चढ़ाव से बढ़ रही अस्थमा की तकलीफ यह भी पढ़ें- मोबाइल-टीवी की लत और अधूरी नींद बन रही है अस्थमा का बड़ा कारण, स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा यह भी पढ़ें- अस्थमा के बढ़ते खतरे के बीच जागरूकता ही बचाव के लिए सबसे बड़ा ह...