लखनऊ, नवम्बर 3 -- लखनऊ, प्रमुख संवाददाता विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों को छात्रों से ली गई फीस का हिसाब देना होगा। विद्यार्थियों की सुविधाओं की बजाए की जा रही फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी। विद्यार्थियों को लाइब्रेरी में पुस्तकालय, प्रयोगशाला में जरूरी उपकरण व अन्य सुविधाएं दिलाने में पारदर्शिता बढ़ेगी। फिलहाल, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसका ब्यौरा मांगा गया है। विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में चल रहे सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों की आय की 75 प्रतिशत धनराशि छात्र सुविधाएं बढ़ाने व पाठ्यक्रम को बेहतर ढंग से संचालित करने पर खर्च होना जरूरी है। फिर भी इस नियम को ताक पर रखकर विश्वविद्यालय व कॉलेज आय का मनमाना उपयोग कर रहे हैं। विद्यार्थियों को पुस्तकालय में ढंग से किताबें नहीं मिल पाती, प्रयोगशाला में केमिकल व उपकरणों की कमी रहती है और कोर्स के विक...