नई दिल्ली, अप्रैल 17 -- नई दिल्ली। लोकसभा एवं विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण को जल्दी लागू करने से जुड़े विधेयकों के लोकसभा में गिर जाने से आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति गरमा सकती है। इस विधेयक को समर्थन नहीं करने पर सत्ता पक्ष ने विपक्ष को महिला विरोधी करार दिया है। साथ ही उसे इसके राजनीतिक फायदे की भी उम्मीद है। वहीं, विपक्ष इसे सत्तापक्ष की बड़ी राजनीतिक हार मान रहा है। सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत नहीं है। ऐसी स्थिति में विपक्ष को भरोसे में लेकर चलना होता है। यह भी पढ़ें- महिला आरक्षण अधिनियम की अधिसूचना को लेकर विपक्ष हमलावर इस मामले में विपक्ष चाहता था कि चुनाव के बाद यानी 30 अप्रैल के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक हो और आगे बढ़ा जाए लेकिन सर...