रांची, मार्च 31 -- चान्हो, प्रतिनिधि। आदिवासी परंपरा और सामूहिक एकता के प्रतीक विशु शिकार (सेंदरा) को लेकर चैत माह की अंतिम तिथि पर मंगलवार को ग्रामीणों का जत्था जंगल की ओर रवाना हुआ। ढोल, नगाड़ा, घंटा और पारंपरिक हथियारों के साथ गणेशपुर, बुचाओपा, जयपुर, नावाडीह, लुपुंगा, टीकराटोली, सोंस, बेयासी और मदई सहित कई गांवों के लोग नाचते-गाते जुलूस के रूप में निकले। इस दौरान पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा और ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। परंपरा के अनुसार सेंदरा पर जाने वाले ग्रामीणों को गांव में सिंदूर लगाकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाकर परिजनों को विदाई दी, वहीं पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य कर अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। यह परंपरा आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ए...
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