प्रयागराज, अप्रैल 24 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग और वैवाहिक शोषण के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पति की याचिका को न केवल खारिज कर दिया, बल्कि उस पर 15 लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह हर्जाना न केवल पीड़ित पत्नी को राहत देने के लिए है, बल्कि उन लोगों के लिए एक सबक भी है जो झूठे आधारों पर न्यायालयों का समय बर्बाद करते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने रंजीत सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है।याची यह भी पढ़ें- शादी किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 लाख हर्जाना भी लगाया रंजीत सिंह ने याचिका दाखिल कर इटावा फैमिली कोर्ट में लंबित अपने भरण-पोषण के मामले को जल्द नि...
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