छपरा, अगस्त 20 -- इसुआपुर, एक संवाददाता। प्रखंड के इसुआपुर गांव स्थित जहरी माता के परिसर में सुन्दर कांड पाठ के 12 वें साल के समापन पर आध्यात्मिक मंच से प्रवचन करते हुए संत विधा भूषण जी महाराज ने कहा कि रामचरितमानस के सुंदरकांड में विभीषण शरणागति का महत्वपूर्ण प्रसंग आता है। रावण जब मंत्रियों से युद्ध में विजय का उपाय पूछता है, तभी विभीषण सभा में पहुंचकर सीता को भगवान श्रीराम को लौटाने की सलाह देते हैं।

विभीषण का अपमान नीति की बात रावण को नागवार गुजरती है और वह क्रोधित होकर विभीषण को लात मारकर सभा से निकाल देता है। विभीषण लंका छोड़कर भगवान श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं। श्रीराम उन्हें 'लंकेश' कहकर संबोधित करते हैं और उनकी शरणागति स्वीकार करते हैं। विभीषण के लंका छोड़ते ही रावण का दुर्दिन शुरू हो जाता है। प्रसंग का संदेश है कि जिस सभा मे...