विपत्ति के समय होती सच्चे मित्र की पहचान : राघवेन्द्र शास्त्री
खगडि़या, जून 9 -- गोगरी । एक संवाददाता जमालपुर गोगरी स्थित गौशाला परिसर में सात दिवसीय श्री मद भागवत कथा का आयोजन किया 2 जून से किया गया था। जिसमे केरल से आए प्रवचन कर्ता आचार्य राघवेन्द्र शास्त्री जी महाराज ने कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के बचपन के मित्र और गुरुकुल के सहपाठी थे। वे बहुत ही गरीब ब्राह्मण थे। पत्नी और बच्चों के साथ बड़ी मुश्किल से जीवन-यापन करते थे। एक दिन सुदामा की पत्नी ने उन्हें द्वारका जाकर अपने मित्र श्रीकृष्ण से मदद मांगने को कहा। यह भी पढ़ें- विपत्ति के समय होती सच्चे मित्र की पहचान : राघवेन्द्र शास्त्री सुदामा खाली हाथ जाने में संकोच कर रहे थे, तो पत्नी ने पड़ोस से थोड़े से चावल मांगकर पोटली में बांध दिए।द्वारका पहुंचने पर श्री...
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