मुख्य संवाददाता, सितम्बर 18 -- राजकीय महाविद्यालयों में 2005 से 2008 के बीच संविदा पर नियुक्त और 2016 में विनियमित किए गए 290 शिक्षकों की पुरानी सेवा को जोड़ते हुए कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत पदोन्नति का लाभ देने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में शासन की ओर से 26 अगस्त और उच्च शिक्षा निदेशालय की तरफ से दो सितंबर को पत्र जारी किया गया है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।टीचरों ने दिया यूजीसी की गाइडलाइन का तर्क विरोध कर रहे शिक्षकों का तर्क है कि राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए वैधानिक संस्था उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) है, जबकि संविदा शिक्षकों का चयन मात्र उच्च शिक्षा निदेशालय के स्तर से किया गया था। संविदा शिक्...
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