लखनऊ, दिसम्बर 22 -- लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। स्कूल-कॉलेजों से कामर्शियल से भी ज्यादा ऊंची दरों पर बिजली बिल लिया जाता है। इसका खुलासा सोमवार को विधान परिषद सदन में हुआ। सरकार ने भी इसे स्वीकार किया और इसका मुद्दा उठाने वाले सपा सदस्यों से कहा कि यह पुरानी व्यवस्था है जो 2001 से चली आ रही है। दरअसल विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने सवाल में पूछा कि प्रदेश के शिक्षण संस्थान जो छात्रों को शिक्षा दे रहे हें, वे व्यवसाय कर रहे हैं या सामाजिक कार्य? यदि सामाजिक कार्य कर रहे हैं तो व्यावसायिक बिजली बिल क्यों वसूला जा रहा है। इस पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने जवाब दिया कि बिजली दरों का निर्धारण विद्युत नियामक आयोग विभिन्न उपभोक्ता संगठनों से आपत्तियां और सुझाव लेकर करता है। इस पर लाल बिहारी यादव ने कहा कि शिक्षण सं...