लखनऊ, अगस्त 4 -- लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। राज्य सरकार प्रदेश के अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक व प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण के मामले में इसी माह कोई सकारात्मक निर्णय लेगी। विधान परिषद में सभापति के निर्देश के बाद सरकार ने सदन को यह आश्वासन दिया है।दरअसल, शिक्षक़ नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शून्यकाल में औचित्य का सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम-1921 के तहत संचालित एवं अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत तदर्श शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण के आदेश जारी किए जाते रहे हैं। प्रदेश में कोई भी व्यक्ति इन माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य तब तक नहीं बन सकता, जब तक कि इन माध्यमिक विद्यालयों अथवा इस स्तर एवं उच्च शैक्षिक संस्थाओं में कम से कम चार वर्ष तक शिक्षक के रूप में कार्य न किया हो...