स्मृति काक रामचंद्रन, सितम्बर 23 -- बहुजन समाज पार्टी (BSP) का संसद में प्रतिनिधित्व खत्म होने जा रहा है। 25 नवंबर के बाद पार्टी का राज्यसभा में भी कोई सांसद नहीं रहेगा। लोकसभा में BSP पहले से ही शून्य पर है। 1989 में संसद में पहुंचने के बाद यह पहली बार होगा, जब पार्टी दोनों सदनों में पूरी तरह गैर-मौजूद होगी। बहुजन समाज पार्टी की स्थापना 1984 में कांशीराम ने दलितों को राजनीतिक ताकत और प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से की थी। पार्टी की राजनीति में यह विचार प्रमुख रहा कि जिस समुदाय की संख्या जितनी अधिक हो, सत्ता में उसकी हिस्सेदारी भी उतनी ही होनी चाहिए। लेकिन पिछले एक दशक से BSP के राजनीतिक प्रभाव में लगातार गिरावट देखने को मिली है। अब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने अपना राजनीतिक आधार बचाए रखने की बड़ी चुनौत...