नई दिल्ली, जनवरी 21 -- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई है। विधायिका संविधान संरक्षक के रूप में यह अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए देश में न केवल विधायी कार्यों के लिए रूपरेखा तैयार करती है, बल्कि यह समग्र विकास की कार्ययोजना का मंच भी होती है। संविधान के तीन शब्द न्याय, समता और बंधुता भारत के लोकतंत्र की आत्मा के रूप में काम करते हैं। विधायिका को इसे केंद्र में रखकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कम से कम 30 बैठकें तो होनी ही चाहिएं। मुख्यमंत्री ने ये बातें लखनऊ में बुधवार को तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि न्याय कैसे प्राप्त होना है, इसका कानून विधायिका के मंच पर तैयार होता है। समतामूलक समाज की स्थापना में सरकार की योजनाए...