नई दिल्ली, अक्टूबर 14 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि विधवा बहू अपनी कमाई या पति की संपत्ति से भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, तो ससुर पर उसका खर्च उठाने की कानूनी जिम्मेदारी है। इसमें केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि रहने के लिए आश्रय उपलब्ध कराना भी शामिल है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने यह टिप्पणी हिंदू दत्तक ग्रहण व भरण-पोषण अधिनियम (एचएएमए), 1956 की धारा 19 और 3(बी) की व्याख्या करते हुए की। मामला पश्चिम विहार की एक संपत्ति से जुड़ा है। संपत्ति मालिक ससुर ने अपने दिवंगत बेटे की पत्नी और दो पोतियों को बेदखल करने की मांग की थी। पति की मृत्यु के बाद भी तीनों दो दशक से अधिक समय से संपत्ति में रह रही थीं। बहू ने दावा किया कि यह उसका साझा घर है और घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत उसे वहां र...