वाराणसी, दिसम्बर 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पुराणों में भगवान् शिव को विद्या का प्रधान देवता कहा गया है। विद्यातीर्थ नाम से पुकारा गया है। सर्वज्ञ माना गया है। उन्हें ज्ञान, इच्छा एवं क्रिया-इन तीन शक्तियों का समन्वय एवं समस्त ज्ञान का स्रोत माना गया है। ये बातें ये बातें स्वामी भगवान वेदांताचार्य ने कहीं। वह फलाहारी बाबा आश्रम की ओर से शिवपुर रामलीला मैदान में हो रहे महालक्ष्मी महायज्ञ के निमित्त आयोजित शिवमहापुराण कथा के छठे दिन बुधवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञानपिपासुओं को उन्हीं की पूजा एवं आराधना करने का विशेष रूप से आदेश किया गया है। उन्होंने कहा कि वेद शिव के निःश्वास हैं, जिन्होंने वेदों से सारी सृष्टि की रचना की। जो विद्याओं के तीर्थ हैं। ऐसे शिव भारत के व्याकरण-रचयिताकारों के कुलगुरु हैं। विद्या निधान भगवान् ...