नई दिल्ली, अक्टूबर 5 -- अब हम एक वैश्विक गांव में रह रहे हैं। नई परिस्थिति में अब एक देश से दूसरे देश में सहायता-राशि हस्तांतरित करना भी बहुत आसान हो गया है। किसी धनराशि के हस्तांतरण का उद्देश्य यदि सचमुच गरीब अथवा विकासशील देशों की मदद करना है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। परंतु, आजकल कुछ देश अन्य देशों में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उथल-पुथल पैदा करने के उद्देश्य से धनराशि का हस्तांतरण करने का प्रयास करने लगे हैं। विशेष रूप से विकसित देश अपनी औपनिवेशिक, विस्तारवादी नीतियों के अंतर्गत इन देशों में गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओज), न्यास व सामाजिक संगठनों के माध्यम से अथवा अन्य माध्यमों से भारी मात्रा में धनराशि का हस्तांतरण करते हैं, ताकि इन देशों के गरीब-वंचित नागरिकों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया जाए और उन्हें ईसाई अथवा मुसल...