बागपत, जुलाई 13 -- बागपत। पति की मृत्यु केवल जीवनसाथी का जाना नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े हिस्से में महिला के वजूद पर ही सवालिया निशान खड़ा कर देता है। जनपद में एक तरफ जहां विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिले की हजारों विधवा महिलाएं आज भी घूंघट के पीछे अपनों के ही दिए दर्द, संपत्ति विवाद और सामाजिक उपेक्षा से जूझ रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि एक साल में ही विधवा महिलाओं के उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और पैतृक संपत्ति पर कब्जे को लेकर 600 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। ----

पिछले 10 वर्षों में उत्पीड़न का ऐसा रहा ट्रेंड यहां महिला थाना, वन स्टॉप सेंटर और पारिवारिक परामर्श केंद्रों के पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों और शोध के अनुसार, विधवा महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों में एक विश...