भागलपुर, अप्रैल 22 -- भागलपुर, मुख्य संवाददाता। मुगलकाल और अंग्रेजी हुकूमत में संताल परगना क्षेत्र का भागलपुर सघन अरण्य वाला जिला कहलाता था। गंगा और कोसी जैसी विशाल नदियों के बीच का यह जिला तीन दशक पहले तक सघन वन क्षेत्र में शामिल था लेकिन बांका के अलग होने के बाद काफी वन भूभाग भागलपुर से जुदा हो गया। जो बचे, अब विकास की भेंट चढ़ रही है। करोड़ों रुपये की परियोजना को साकार करने में हजारों हरे-भरे पेड़ प्रतिवर्ष कुल्हाड़ी की भेंट चढ़ती है। नये पौधे भी लगाए जाते हैं लेकिन इसकी तासीर ठंड भरी नहीं होती है। यह अलग बात है कि बचे दरख्तों (पेड़) पर सैकड़ों की संख्या में आज भी परिंदे आशियाना बना बैठे दिख जाते हैं। यह भी पढ़ें- गंगा-भागीरथ वनों को संरक्षित श्रेणी में शामिल कराने की तैयारी गंगा कल्चरल डॉक्यूमेंटेशन की सर्वेक्षण रिपोर्ट में भागलपुर के...