सोनभद्र, अक्टूबर 6 -- म्योरपुर, हिंदुस्तान संवाद। पूर्वी विंध्यांचल की समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेषकर जनजातीय समाज के पारंपरिक ज्ञान को अब व्यवस्थित रूप से संजोने और उसका अध्ययन करने की पहल शुरू हुई है। इसमें सोनभद्र क्षेत्र को केंद्र में रखते हुए यहां की प्राचीन औषधीय परंपरा, जड़ी-बूटियों की पहचान, उनके उपयोग तथा लोक जीवन से जुड़े ज्ञान का अध्ययन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित करना और भारतीय संस्कृति के विकास में उसके योगदान को सामने लाना है।

शोध प्रकल्प की विशेषताएँ शोध प्रकल्प की प्रमुख अध्यक्ष डॉ. बीना सेंगर ने अपने तीन दिवसीय अध्ययन के बाद बताया कि डीएफओ कमल कुमार सिंह और ग्रामीण क्षेत्र के जड़ी बूटी से इलाज करने वाले विशेषज्ञों से उपयोगी बातचीत की। प्रो बीना के नेतृत्व में शोधक...