नई दिल्ली, जनवरी 7 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'महज इसलिए कि मुकदमा लड़ने वाले का कोई रिश्तेदार पुलिस में सिपहाी या अदालत कर्मी है, न्यायाधीश को पक्षपाती नहीं माना जा सकता है। शीर्ष अदालत ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है। जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने महिला की ओर से उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है। महिला ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसकी शिकायत पर शुरू किए गए आपराधिक मामले की कार्यवाही को अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम श्रेणी), संगारेड्डी की कोर्ट से नामपल्ली, हैदराबाद के महानगर दंडाधिकारी के पास उसके पति की मांग पर मामले को स्थानांतरित कर दिया ...
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