नई दिल्ली, अप्रैल 19 -- होर्मुज जलमार्ग से गुजरते समय दो भारतीय वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी फौज की तरफ से हुई गोलीबारी दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, बेहद चिंताजनक भी है। आखिर ऐसा क्यों हुआ कि भारतीय ध्वज लगे जहाज पहली बार इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के निशाने पर आ गए? बेशक, होर्मुज को पूरी तरह खोलने के ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एलान के महज 24 घंटे के भीतर इसे दोबारा बंद करने की घोषणा कर दी गई थी, लेकिन ईरान पहले भी भारतीय पोतों के लिए सुरक्षित रास्ता दे चुका है। ब्योरे यही बताते हैं कि अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 10 भारतीय पोत यहां से निकलकर भारत आए हैं। फिर ईरानी फौज ने यह कदम क्यों उठाया? उचित ही नई दिल्ली ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाया है। शनिवार देर शाम विदेश मंत्रालय ने न सिर्फ ईरानी राजदूत मोहम्मद फताली को तलब क...