कन्नौज, जून 24 -- छिबरामऊ, संंवाददाता। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का पावन व्रत इस बार 25 जून, गुरुवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इसे वर्ष का सबसे कठिन एवं श्रेष्ठ एकादशी व्रत माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक बिना जल ग्रहण किए व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। शक्तिपीठ गमा देवी मंदिर के पुजारी पंडित बनारसी दास शास्त्री ने बताया कि निर्जला एकादशी का विधिपूर्वक पालन करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु 24 घंटे तक निर्जल व्रत रखने में असमर्थ हों, वह सूर्योदय से सूर्यास्त तक भी व्रत रख सकते हैं। यह भी पढ़ें- 25 जून को दुर्लभ संयोग, निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती एक साथ, जानें व्रत-मंत्र का अद्भुत कनेक्...