जमशेदपुर, अप्रैल 4 -- युवा साहित्यकार वरुण प्रभात के कविता संग्रह अंतहीन रास्ते पर परिचर्चा का आयोजन जनवादी लेखक संघ की सिंहभूम इकाई की ओर से शुक्रवार को तुलसी भवन में किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में युवा कवि निशांत सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह संकलन गागर में सागर वाली कहावत को चरितार्थ करता है। इनकी कविताएं आरंभ से अंत तक मजबूत पकड़ बनाए रखती है और पाठक को सोचने पर मजबूर करती है। वरिष्ठ साहित्यकार शैलेन्द्र अस्थाना के अनुसार, इस संकलन की कविताओं में युवा मन की बेचैनी है, जो पीड़ा, आक्रोश, भावना, संवेदना के साथ उभरी है। सुधीर सुमन ने कहा कि इस संकलन को पढ़ने के बाद एक वैश्विक परिदृश्य उभरकर सामने आता है, जिसमें युद्ध की विभीषिका है तो रोजी-रोटी का संघर्ष भी। डॉ. सुभाष चंद्र गुप्त ने कविताओं को पढ़ने, समझने और उसे आत्मसात करने पर...