वट सावित्री से सुहागिनों ने मांगा अखंड सौभाग्य
वाराणसी, मई 17 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री पूजन का महात्म्य है। शहर में शनिवार को कई स्थानों पर सुहागिनों ने अखंड सौभाग्य के लिए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि वट (बरगद) वृक्ष के तीन हिस्सों में ब्रह्मा-विष्णु-महेश का वास है। ग्रामीण इलाकों में भी परंपरा का निर्वाह किया गया। इसी पूजा के बल पर सावित्री ने अपने पति सत्यवान का प्राण यमराज से छुड़ा लिया था। सुहागिनों ने वट वृक्ष पर रोली का तिलक लगाया। चावल, भीगा चना, गुड़ और हल्दी चढ़ाया। धूप प्रज्ज्वलित कर दीपक जलाया। इसके बाद उन्होंने बांस के सत्यवान-सावित्री की मूर्ति रखकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने भैंसे पर सवार यमराज की प्रतिमा को भी चंदन, रोली, केशर, फल-फूल और मिष्ठान अर्पित कर धूप-दीपक दिखाया। अंत में वट वृक्ष के तने पर कच्चा सूत ...
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