शिमला, अक्टूबर 8 -- कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकील के रूप में नामांकन से पहले किसी विधि स्नातक की आपराधिक पृष्ठभूमि की कितनी और किस स्तर तक जांच होनी चाहिए, यह सवाल हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अभिमन्यु राठौर की ओर से व्यक्तिगत रूप से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी।पूछी जाती है आपराधिक जानकारी याचिका में हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के उस आवेदन फॉर्म का हवाला दिया गया है, जिसे एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 25 के तहत वकील के रूप में नामांकन के लिए भरा जाता है। याचिका के अनुसार आवेदन फॉर्म के क्...