लखनऊ, अगस्त 21 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। औपनिवेशिक भारत में वंदे मातरम का विरोध पूरी तरह विभाजनकारी राजनीति का हिस्सा था। अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष एवं एमएलसी डा. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि वंदे मातरम का प्रथम विरोध मुस्लिम लीग के अध्यक्ष रहे बैरिस्टर सैय्यद अली इमाम ने वर्ष 1909 में अमृतसर अधिवेशन में, तुर्की के खलीफा और उस्मानी राज्य की रक्षा के लिए खिलाफत आंदोलन चलाने वाले मुस्लिम लीग के 1908 में अध्यक्ष रहे मो. अली जौहर ने कांग्रेस के काकीनाड़ा अधिवेशन में किया। जौहर वर्ष 1923 में कांग्रेस का अध्यक्ष रहते वन्दे मातरम् का न केवल विरोध किया बल्कि कांग्रेस अधिवेशन का बहिष्कार किया। यह भी पढ़ें- कांग्रेस पर सवाल उठा रही भाजपा, लेकिन अपने ही नगर निगम ने गाए 'वंदे मातरम' के सिर्फ 2 अंतरे वंदे मातरम् का विरोध मो....