चित्रकूट, अगस्त 29 -- चित्रकूट, संवाददाता। अनुसुइया आश्रम मोड़ के समीप आयोजित तीन दिवसीय सत्संग व रक्षाबंधन कार्यक्रम का समापन हो गया। आखिरी सत्र में बाबा जयगुरुदेव के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि इस समय लोगों के कर्म बहुत खराब है। जिससे देवी-देवता नाराज है। धरती भी दुखी है, क्योंकि इस पर बहुत से जानवर मारे जा रहे हैं। उन्होंने सत्संग में कहा कि समर्थ गुरु द्वारा नामदान के समय दिया गया नाम अमोलक व अनमोल चीज है। इसकी कोई भी कीमत नहीं लगा सकता है। पहले के समय में राज पाट देने व घर छोड़नेपर भी लोगों को यह नाम नहीं मिला है। यह तो जब जीव नरक में जाने लगते हैं, उनके कर्म खराब हो जाते हैं, तब सतपुरुष की दया होती है और वह संत रूप में इस धरती पर आते हैं। यह नाम शब्द रूपी नाम हैं और यह मुंह से नहीं लिए जाते हैं, यह अंदर में स...