कुशीनगर, अप्रैल 13 -- फाजिलनगर, हिन्दुस्तान संवाद।फाजिनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी में चल रहे लोकरंग महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को 11 बजे से लोक संस्कृति के नायक बनाम वंचितों की संघर्ष गाथा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देशभर से विद्धानों ने हिस्सा लेकर मंथन किया। इसमें शामिल विद्वानों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने लोक नायकों, वंचित समाज एवं उनके इतिहास की उपेक्षा पर अपने विचार रखे। संगोष्ठी का केंद्रीय विषय यह रहा कि किन परिस्थितियों में समाज का एक तबका बागी बनता है और क्यों उनके नायकों को मुख्यधारा के इतिहास में समुचित स्थान नहीं मिल पाता है।लोकरंग आयोजन समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कुशवाहा ने प्रारंभ में वंचित नायकों के निरूपण में लोक साहित्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि लोक परंपराएं ही वह आधार हैं, जिनके माध्यम से हाशिए ...