लखीसराय, मार्च 25 -- चानन, निज संवाददाता। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ चैती शुल्क चतुर्थी यानी रविवार से नहाया, खाया के साथ शुरू हो गया। छठ व्रत को लेकर कई कथा प्रचलित है। ऐसी मान्यता है की नेम निष्ठा के इस महापर्व को चार आयाम में विद्वानों द्वारा बाटा गया है। यह अत्यंत पवित्र त्यौहार है, जो चैत मास के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। पहला आयाम: नहाय- खाय:हिन्दुओं के इस महान पर्व को मनाने में पहले दिन छठ व्रतियों द्वारा गंगा स्नान कर पवित्र तरीके से बना शुद्ध भोजन कर व्रत की शुरूआत करती हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन उपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। अरवा चावल , दाल, कद्दू का भोग पहले सूर्य भगवान को लगाते हैं फिर परिवार के लोग खाते हैं।दूसरा आयाम: लोहंडा या खरना:चैत मास के पंचम...