प्रयागराज, जनवरी 7 -- प्रयागराज, संवाददाता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में चल रही शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी के अंतर्गत चौथे दिन 'साहित्यिक संचेतना का तीर्थ' विषय पर व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि माघ मेला लोक आस्था, साहित्य और दर्शन के संवाद का केंद्र बना हुआ है। इसका साहित्यिक महत्व उसके पौराणिक संदर्भों, सांस्कृतिक विरासत व धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। प्रयाग से ही उस परंपरा का अभिलेखिक साक्ष्य मिलता है, जहां दर्शन, स्नान व देह-त्याग के माध्यम से मोक्ष की संकल्पना विकसित हुई है। दूसरे वक्ता अजीत प्रताप सिंह ने कहा कि प्रयागराज को साहित्यिक संचेतना का तीर्थ कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है बल्कि यह संपूर्ण विश्व की साहित्यिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रत...