नई दिल्ली, अक्टूबर 12 -- लोकतंत्र केवल चुनाव कराने, सरकार बनाने और शासन करने की व्यवस्था का नाम नहीं है। इसकी वास्तविक शक्ति नागरिकों को अपनी बात कहने, असहमति जतानेे और अपनी सरकार से प्रश्न पूछने की आजादी में निहित है। जिस व्यवस्था में नागरिक अपनी शिकायतें खुलकर सामने रख सकें, शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर सकें और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठा सकें, वही व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है। हालांकि, जब विरोध-प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच टकराव की स्थिति पैदा होती है, तब नागरिक अधिकारों की रक्षा व कानून का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित...