गंगापार, अगस्त 5 -- अवधी के प्रख्यात जनकवि जुमई खां आजाद की जयंती पर बुधवार को कटका स्थित केएन कॉन्वेंट स्कूल में आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि जुमई खां का साहित्य केवल कविता नहीं, बल्कि समाज के वंचित, शोषित और मेहनतकश वर्ग के जीवन-संघर्ष का जीवंत दस्तावेज है। मुख्य वक्ता एवं हास्य कवि अशोक बेशरम ने कहा कि जुमई खां ने सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए अपनी रचनाओं के माध्यम से लोकजीवन की पीड़ा, अभाव, भूख, असुरक्षा, बेरोजगारी और सामाजिक विषमताओं को प्रभावशाली ढंग से स्वर दिया। यही कारण है कि उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और साहित्य समाज को नई दृष्टि प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि जुमई खां की बहुचर्चित कविता ''कथरी तोहार गुन उइ जानइ, जे करै गुजारा कथरी मा'' आज भी जनमानस...