रायपुर, जून 30 -- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 29 जून को कहा कि जब दो बालिग लोग लंबे समय से लिव-इन रिलेशनशिप में हों, तो कानून यह मानकर चलता है कि उनके बीच शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने थे, और बाद में पुरुष का महिला से शादी करने से इनकार करना रेप नहीं माना जाएगा। जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लिव इन में रह रहा कपल भले ही शादी करना चाहता हो लेकिन केवल इच्छा से ये साबित नहीं होता कि उनके बीच शारीरिक संबंध शादी के वादे की वजह से बने थे। कोर्ट ने कहा, लॉन्ग टर्म लिव इन रिलेशनशिप के मामले में ये माना जा स सकता है कि सबकुछ दोनों की मर्जी से हुआ और वे इसके नतीजों से वाकिफ भी थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को कोर्ट को सिर्फ किताबी या सीमित नजरिए से नहीं देखना चाहिए बल्कि उस रिश्ते की अ...