नई दिल्ली, फरवरी 6 -- गौरव वल्लभ, सदस्य, प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद बीती 2 फरवरी को घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस बात को दर्शाता है कि अस्थिर वैश्विक व्यवस्था में आर्थिक संबंधों पर बातचीत का तरीका कैसे बदल रहा है। आज व्यापार केवल शुल्क-सूचियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तुलनात्मक बाजार पहुंच और रणनीतिक विश्वास से जुड़ा हुआ है। इस संदर्भ में नई दिल्ली द्वारा हासिल किया गया नतीजा अमेरिका के साथ भारत की आर्थिक सौदेबाजी की क्षमता में एक संतुलित, मगर ठोस मजबूती दिखाता है। इस समझौते का सबसे अहम पहलू अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर शुल्क को 18 प्रतिशत पुनः निर्धारित करना है। यह पहले लगाई गई 50 प्रतिशत दर की तुलना में काफी कम है और एशियाई निर्यातकों के बीच भारत को अपेक्षाकृत अनुकूल स्थिति में रखता है। व्यावहारिक तौर पर इसका अर्थ य...