नई दिल्ली, अप्रैल 23 -- अक्सर ऐसा देखा गया है कि विश्वविद्यावयों में सेशन की लेटलतीफी, समय पर परीक्षा का न होना और फिर महीनों तक रिजल्ट का इंतजार करना, यह सब बिहार के सिस्टम की एक आम पहचान बन गई थी। कई बार ऐसा होता है कि छात्र अपनी कड़ी मेहनत से सिविल सर्विसेज, रेलवे, बैंकिंग या एसएससी जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन जब फॉर्म भरने का वक्त आता है, तो पता चलता है कि उनके पास ग्रेजुएशन की फाइनल मार्कशीट ही नहीं है। महज एक कागज के टुकड़े और यूनिवर्सिटी की सुस्ती की वजह से युवाओं के सपनों पर पानी फिर जाता है। लेकिन अब राज्य के विश्वविद्यालयों की इस लचर व्यवस्था को सुधारने के लिए ऊपर से सख्त डंडा चल गया है। लोकभवन से एक ऐसा कड़ा आदेश जारी हुआ है, जिसने तमाम विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा कर र...
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