जमुई, मार्च 25 -- खैरा, सत्येंद्र सिंह भूषण खैरा की नदियाँ सदियों से अनवरत प्रवाहित होकर न केवल इस धरा की प्यास बुझाती रही हैं, बल्कि हमें जीवन का सुखद अहसास भी प्रदान करती रही हैं। घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों की गोद से निकलने वाली ये नदियाँ वर्षों से जागृत रहकर मानवीय सभ्यता का पोषण कर रही हैं। यहाँ तक कि मरुभूमि और ऊबड़-खाबड़ जमीन पर भी हरियाली बिखेरने का श्रेय इन्हीं जलधाराओं को जाता है, मगर आज विडंबना यह है कि हमारी इन जीवनदायिनी नदियों की अविरल धारा धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।नदियों का भौतिक स्वरूप आज गंभीर संकट में है। यदि इनका अस्तित्व इसी तरह घटता रहा, तो न तो यह मानव प्रजाति की सेवा कर पाएंगी और न ही पशु-पक्षियों व वनस्पतियों का संरक्षण कर सकेंगी। जिन नदियों में सदियों से बालू की परतें उनका प्राकृतिक श्रृंगार बनी हुई थीं, आज अवैध...
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